गयाजी में पितृ पक्ष मेला शुरू है. आज धर्मारण्य, ब्रह्मा सरोवर, सरस्वती और अन्य वेदियों पर पिंडदान से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है.// LIVE NEWS 24
गया: बिहार के गयाजी में विश्व प्रसिद्ध पितृपक्ष मेला चल रहा है. पितृपक्ष मेले के बीच गया श्राद्ध के चौथे दिन बोधगया में रहीं प्रमुख वेदियों पर पिंडदान करने का विधान हैं. यहां धर्मराज युधिष्ठिर भी पिंडदान करने के लिए आए थे. आज धर्मारण्य, ब्रह्मा सरोवर, सरस्वती, मातंग वापी, काक बली और आम्र सिंचन वेदियों पर पिंडदान का विधान है. मान्यता है कि इन वेदियों पर पिंडदान से पूर्वजों-पितरों को बैकुंठ लोक की प्राप्ति होती है.
चावल, गुड़ और तिल के पिंड से होता है पिंडदान: इन वेदियों पर चावल, गुड़ और तिल के पिंड से पिंडदान किया जाता है. चावल, तिल, गुड़ के पिंड से पिंडदान करने से प्रेत बाधा से पितर मुक्त हो जाते हैं और पितृ दोष दूर हो जाता है. यही वजह है कि इन वेदियों पर पिंडदान के लिए देश भर से लोग आते हैं.
उड़द की दाल से पिंडदान करने की भी मान्यता: इन वेदियो में ब्रह्म सरोवर में उड़द की दाल से पिंडदान करने की भी मान्यता है. त्रैपाक्षिक श्राद्ध करने जो तीर्थयात्री आते हैं, उनके द्वारा नियमानुसार आज के दिन इन्हीं वेदियों पर पिंडदान किया जाता है.
पंचवेदी के रूप में है मान्यता: गया श्राद्ध के चौथे दिन जहां-जहां पिंडदान किया जाता है, उसे पंचवेदी तीर्थ के रूप में मान्यता दी जाती है. महाभारत का युद्ध होने के बाद भगवान कृष्ण युधिष्ठिर को साथ लेकर यहां स्वयं आए थे. इसके बाद युधिष्ठिर ने पिंडदान का कर्मकांड किया था.
6 लाख से अधिक तीर्थयात्री पहुंचे गयाजी: अब तक 6 लाख से अधिक तीर्थयात्री गयाजी पहुंच चुके हैं. गया श्राद्ध के तीसरे दिन इतने यात्री आए हैं. वहीं, चौथे दिन आज गयाजी आने वाले तीर्थ यात्रियों की संख्या 9 लाख के आसपास पहुंच सकती है. फुट काउंटिंग मशीन के आधार पर मंगलवार को 2 लाख 37 हजार तीर्थयात्री मेला क्षेत्र में पिंडदान करने पहुंचे और अब तक कुल संख्या तीसरे दिन संध्या तक 6 लाख 21 हजार 114 तक पहुंच गई है.
कहां और कैसे होता है पिंडदान : पितृपक्ष में पुनपुन तट, फल्गु नदी, ब्रह्म कुंड, प्रेत शिला, रामशिला, सीता कुंड, विष्णुपद मंदिर समेत कई पवित्र स्थलों पर पिंडदान किया जाता है. हर दिन अलग-अलग वेदियों और कुंडों पर आचार्यों के निर्देशन में पिंडदान और तर्पण का विधान है.
खीर के पिंड से पिंडदान का विधान
7 सितंबर से शुरू पितृपक्ष मेला: बता दें कि इस बार पितृपक्ष मेला 6 सितंबर से शुरू हुआ है, जो 21 सितंबर तक चलेगा. इस बार शासन-प्रशासन की तरफ से आधुनिक सुविधाएं की गई हैं, ताकि गयाजी आने वाले लोगों को परेशानियों का सामना ना करना पड़े.''आज गया श्राद्ध का चौथा दिन है. इस दिन धर्मारण्य समेत अन्य वेदियों पर पिंडदान का कर्मकांड करने की काफी मान्यता है. धर्मारण्य पिंडवेदी पर धर्मराज युधिष्ठिर भी पिंडदान करने आए थे. इससे इस वेदी का महत्व समझा जा सकता है''. -राधा बल्लभ शरण, तीर्थ पुरोहित धर्मारण्य
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